Friday, August 2, 2024

जय श्री राम

काव्य गीत
            
           जय श्री राम 
                           नफे सिंह कादयान

जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

जब अंधेरों का धरती पे डेरा हुआ,
हर शख्स असुरों ने था घेरा हुआ,
सारे जग में जिस तारे का फेरा हुआ,
हर लब पे हुआ उसका नाम,
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

वो है दशरथ नंदन, कोशल्या का लाल,
हुआ शस्त्र शास्त्रों में रोशन उसका भाल,
जिसे हल ना करे प्रभु किसका सवाल,
सबने नाम झपा सुबहो शाम,
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

हर धनुर्धर सभा में बुलाया गया,
जानकी का स्वयंबर रचाया गया,
जब रघुवर से धनुष उठाया गया,
सीता चली अपने प्रभु के धाम, 
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

राम जी का राज्यभिषेक होने लगा,
अधम कैकई मन विषबेल बोने लगा,
चौदह साल जब वनवास होने लगा,
पिता दशरथ रोये सुबहो शाम,
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

मृग मारिच का दोखा बस झंजाल था,
लक्ष्मण रेखा लंघी ये भी मलाल था,
वो सीता हरण रावण काल था,
सबके दुख हर लेता राम नाम,
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

सारी लंका जली, आसमा जल गया,
बजरंगी लंका को ढहके असुर तल गया,
सुग्रीव, अंगद का लंका जब दलबल गया,
पापियों का जीना हुआ हराम, 
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

जब रणभेरी बजी जलजला आ गया,
विभीषण प्रभु चरण में पनाह पा गया,
राम कोदंड जब लाखों असुर खा गया,
पापियों का हो यही अंजाम,
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।

धरती पाताल ना अब कोई अधम रहे,
सीता माता विघ्न में क्यों गम सहे,
तेरी जय राम, रावण मरते दम कहे,
सारे जगत के दुख हरता है ये नाम,
जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम,
जय जय राम, जय जय राम, जय जय राम।
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  संक्षिप्त लेखकीय परिचय- 
नाम- नफे सिंह कादयान, पता:- गाँव- गगंनपुर, जिला-अम्बाला, डाकघर- बराड़ा-133201 (हरि.) mob.9991809577
जन्म- 25 मार्च 1965, कार्य– खेती-बाड़ी, नव-लेखन। Email-nkadhian@gmail. com, 
मुख्य सम्मान:-
1- हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा व्यवस्था कहानी के लिये सम्मान- वर्ष-2009
2- B.D.S साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा श्रेष्ठ लेखन के लिये डॉक्टर भीमराव अम्बेदकर राष्ट्रीय फैलाशीप अवार्ड- वर्ष .2013
3- हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा ‘चैतन्य पदार्थ’ (विज्ञान निबंध पदार्थ सरचना) पुस्तक के लिये श्रेष्ठ कृति पुरस्कार-वर्ष 2017, 
4- हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा आयोजित राष्ट्रीय निबंध प्रतियोगिता में प्रथम आने पर सम्मानित। 22 मई 2020
रचनाएं:- प्रकाशित पुस्तकें 6 :- ( विज्ञान, राजनीति, सामाजिक विषयों पर, जिसमें एक उपन्यास, एक हरियाणवी रागणी संग्रह है प्रकाशित, अप्रकाशित टंकित पुस्तकें  4- एक उपन्यास, कथा संग्रह, एक इंजिनियरिंग विषय पर । ) 
       कहानियाँ, आलेख, संस्मरण, गजल़, कविता, पत्र, दैनिक ट्रिब्यून, हंस, हिमप्रस्थ, हरिगंधा, वीणा, कथायात्रा, शुभ तारीका, हरियाणा साहित्य अकादमी, विश्व हिंदी साहित्य मॉरिशस की व अन्य पत्र-पत्रिकाओं, पुस्तकों में प्रकाशित। 
          मेरा जीवन जीने का तरीका-  ‘मस्त रहो, खुश रहो, जो खा लिया अपना, रह गया बैगाना।’ 
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